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लेखनी प्रतियोगिता -23-May-2022 उद्घाटन समारोह

           आज शहर में मन्त्री जी  रेलवे ब्रिज के नीव का  पत्थर रखने आने वाले थे । शहर के बडे बडे़ लोग वहा आये हुए थे सभी लोग मन्त्रीजी की प्रतीक्षा में बैठे थे। 


  अचानक मौसम  बहुत खराब होगया और बहुत ही जोर से बर्षात शुरू होचुकी थी। मन्त्रीजी के लिए बनाई गयी स्टेज खराब होगयी। चारौ तरफ पानी ही पानी होगया  ।
     जो लोग  मन्त्रीजी के स्वागत के लिए आये थे वह भी मौसम खराब हौने के कारण अपने अपने घरौ को बापिस जाचुके थे।

     अब वहाँ पर कुछ लोग ही बचे हुए थे। जो वहाँ पर थे उनको यह चिन्ता सतारही थी कि अब क्या करे । मन्त्रीजी के स्वागत के लिए भीड़ कहाँ से लाई जाय जो मन्त्री जी के लिए जय घोष कर सके क्यौकि आजकल के नेताऔ को जय कारा करने वाली भीड़ चाहिए 

     आजकल के नेता भी अजीब होते है वह भीड़ देखकर ही भाषण देते है। यदि भीड़ कम होती है तब उनका मूड खराब होजाता है। इसी लिए नेताऔ की रैली मे किराये की भीड़ लाई जाती है।

    अब कार्य कर्ताऔ को यही डर सतारहा था कि कहीं मन्त्रीजी नाराज न होजाय और उनकी कुर्सी पर संकट के बादल छाजाय। सभी लोग आज की बारिस को कोस रहे थे।

        उन कार्यकर्ताऔ ने ऐसे तैसे करके  स्टेज को सही हालत में करवाया। और पन्डाल को भी ठीक करवाया। उसी समय मैसेज आया कग मन्त्रीजी का हेलीकाप्टर दिल्ली से निकल गया है और वह आधा घन्टे के बाद पहुँच सकता है।

  कार्यकर्ता चौकन्ने होगये और वह फूल मालाए लेकर तैयार होकर खडे़ होगये।

     कुछ समय बाद ही आकाश मे हैलीकाप्टर नजर आया और कुछ समय बाद वह हैलीपैड पर उतर गया।

    सभी लोग उनके उतरने की प्रतीक्षा मे लाईन बनाकर खडे। होगये। मन्त्रीजी जैसे ही बाहर आये सभी लोग उनकी जयघोष करने लगे।
और उनके नीचे आते ही उनके गले में फूल मालाए इस तरह भरदी गयी कि जैसे कचरेका डब्बा भरने के बाद भी कूडा़ दबा दबाकर भरा जाता है।

   कुछ समय बाद मन्त्रीजी को उद्घाटन समारोह स्थल पर लाया गया। परन्तु  मन्त्रीजी ने जैसे ही पन्डाल को खाली देखा और उनकी आँखै लाल व भोहै तन गयी।

    मन्त्री जी बोले," यही अनुशासन है आप लोग यहाँ बैठे क्या कर रहे हो मै इतना बडे़ ब्रिज की  की नीव का पत्थर रखने आया हूँ  जिसकी माँग पिछले बीस बर्षौ से थी। और यहाँ मुझे देखने व सुनने वाला कोई है ही नही।  तुमलोगौ को जो पार्टी फन्ड देती है तुम लोग स्वयं ही डकार जाते होंगे। मुझे मालूम होता कि यहाँ ऐसा हाल होगा मै कभी नही आता। इतना कहकर वह बापिस जाने के लिए मुड़ने लगे।

      परन्तु उसी समय उनके पास  किसी का फौन आगया और वह  उसका उद्घाटन करने लगे।

  मन्त्रीजी  के पास जो फौन आया था वह उनके साडू़ का था वह कह रहा था भाईसाहब आप  इसकी नीव का पत्थर रख कर ही आना ।फिर हम दौनो इसका पैसा बाटलेंगे क्योकि यह ब्रिज  केवल कागजौ में बनेगा। असल में कुछ नही होगा। और इसका कान्ट्रैक्ट मेरे पास ही आयेगा।

     इसी लिए मन्त्रीजी ने उसकी नीव का पत्थर रख दिया और वापिस  चले गये।

     इसके बाद व हाँ केवल नीव का पत्थर ही रहगया ब्रिज तो केवल कागजौ मे ही बनाया गया था और उसका करौडो़ का बजट भी पास हुआ जिसे नेताऔ मन्त्रियौ नेव कान्ट्रक्टर बाट कर खागये।

   कुछ समय बाद  उस ब्रिज की रिपेयर भी हुई। और वह ब्रिज कागजौ मे ही धरासाई होकर गिर गया जिसका कचरा उठाने का पैसा भी लगा 

     हमारे देश में ऐसे लाखौ ब्रिज है कितनी सड़कै है जिनका बाकायदा उद्घाटन होता है कागजो व फाइलौ में बनाई जाती है फिर इनकी मरम्मत भी फाइलौ मे ही हो जाती है। 

               इस तरह  ये नेता न जाने कितना सीमेन्ट रेता बजरी व ईट  बिना हाजमें की गोली खाये डकार जाते है और इनके कभी पेट में दर्द नही होता है।

दैनिक प्रतियोगिता के लिए रचना।
नरेश शर्मा   "पचौरी"
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10 Comments

Kusam Sharma

01-Jun-2022 09:40 AM

Nice

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Shnaya

28-May-2022 02:56 PM

बेहतरीन

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Punam verma

24-May-2022 10:55 AM

Nice

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